यॉर्कशायर, दिसंबर 1888। बूढ़े सर एडमंड ग्रिम्सवोल्ड अपने बंद अध्ययन-कक्ष में मृत पाए जाते हैं, उनका चेहरा दहशत से ऐंठा हुआ है, और घर का हर व्यक्ति क़सम खाकर कहता है कि उसने दीवारों के भीतर ‘धूसर रुदाली’ का विलाप सुना था। उनकी पोती के बुलावे पर शर्लक होम्स और डॉ. वॉटसन जमे हुए मूर को पार करके एक शोकाकुल घर में पहुँचते हैं, जहाँ उनका इंतज़ार कर रहे हैं एक मृत व्यक्ति का कूट-लेख और तीस बरस पुरानी एक खदान-त्रासदी। देहाती हवेली की एक क्लासिक रहस्य-कथा।

गेम्स फ़ॉर द ब्रेन